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Sheetla Ashtami 2019 Date~शीतला अष्टमी

Sheetla Ashtami 2019 Date~शीतला अष्टमी
This year's Sheetla Ashtami 2019 Date~शीतला अष्टमी

Thursday, 28 Mar - 2019

In 2019 Sheetla Ashtami ~शीतला अष्टमी will be celebrated on Thursday, 28th March, 2019
शीतला अष्टमी हिन्दुओं का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जिसमें शीतला माता का व्रत एवं पूजन किया जाता है। शीतलाष्टमी का पर्व होली के सम्पन्न होने के कुछ दिन पश्चात मनाया जाता है। देवी शीतला की पूजा चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि से आरंभ होती है।

बसोडा : शीतला अष्टमी के दिन शीतला माँ की पूजा अर्चना की जाती है तथा पूजा के पश्चात बासी ठंडा खाना ही माता को भोग लगया जाता है जिसे बसौडा़ कहा जाता हैं। वही बासी भोजन प्रसाद रूप में खाया जाता है तथा यही नैवेद्य के रूप में सभी समर्पित भक्तों के बीच प्रसाद के रूप में वितरित किया जाता है।

शीतला माता : शीतला माता एक प्रमुख हिन्दू देवी के रूप में पूजी जाती है। शीतला देवी के संदर्भ में अनेक धर्म ग्रंथों में वर्णन है, स्कंद पुराण में शीतला माता के विषय में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है, जिसके अनुसार देवी शीतला चेचक जैसे रोग कि देवी हैं। यह हाथों में कलश, सूप, मार्जन(झाडू) तथा नीम के पत्ते धारण किए होती हैं तथा गर्दभ की सवारी किए यह अभय मुद्रा में विराजमान हैं। शीतला माता के संग ज्वरासुर ज्वर का दैत्य, हैजे की देवी, चौंसठ रोग, घेंटुकर्ण त्वचा रोग के देवता एवं रक्तवती देवी विराजमान होती हैं। इनके कलश में दाल के दानों के रूप में विषाणु या शीतल स्वास्थ्यवर्धक एवं रोगाणु नाशक जल होता है। स्कन्द पुराण में इनकी अर्चना स्तोत्र को शीतलाष्टक के नाम से व्यक्त किया गया है. मान्यता है कि शीतलाष्टक स्तोत्र की रचना स्वयं भगवान शिव जी ने लोक कल्याण हेतु की थी.

शीतला अष्टमी पूजन : शीतला अष्टमी की पूजा होली के पश्चात आने वाले वाले प्रथम सोमवार अथवा गुरुवार के दिन की जाती है। शीतला माता जी की पूजा बहुत ही विधि विधान के साथ कि जाती है, शुद्धता का पूर्ण ध्यान रखा जाता है। इस विशिष्ट उपासना में शीतलाष्टमी के एक दिन पूर्व देवी को भोग लगाने के लिए बासी खाने का भोग बसौड़ा उपयोग में लाया जाता है। अष्टमी के दिन बासी वस्तुओं का नैवेद्य शीतला माता को अर्पित किया जाता है। इस दिन व्रत उपवास किया जाता है तथा माता की कथा का श्रवण होता है।कथा समाप्त होने पर मां की पूजा अर्चना होती है तथा शीतलाष्टक को पढा जाता है। शीतलाष्टक शीतला देवी की महिमा को दर्शाता है, साथ ही साथ शीतला माता की वंदना उपरांत उनके मंत्र -- वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।  का उच्चारण किया जाता है जो बहुत अधिक प्रभावशाली मंत्र है।पूजा को विधि विधान के साथ पूर्ण करने पर सभी भक्तों के बीच मां के प्रसाद बसौडा को बांटा जाता है इस प्रकार पूजन समाप्त होने पर भक्त माता से सुख शांती की कामना करता है। संपूर्ण उत्तर भारत में शीतलाष्टमी त्यौहार, बसौड़ा के नाम से भी विख्यात है। मान्यता है कि इस दिन के बाद से बासी भोजन खाना बंद कर दिया जाता है। मान्यता के अनुसार इस व्रत को करने से देवी प्रसन्‍न होती हैं और व्रती के कुल में समस्त शीतलाजनित दोष दूर हो जाते हैं, दाहज्वर, पीतज्वर, चेचक, दुर्गन्धयुक्त फोडे, नेत्र विकार आदि रोग दूर होते हैं।

शीतला अष्टमी महत्व : शीतला माता की पूजा के दिन घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता. चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ के कृष्ण पक्ष की अष्टमी शीतला देवी की पूजा अर्चना के लिए समर्पित होती है। इसलिए यह दिन शीतलाष्टमी के नाम से विख्यात है. आज के समय में शीतला माता की पूजा स्वच्छता की प्रेरणा देने के कारण महत्वपूर्ण है. देवी शीतला की पूजा से पर्यावरण को स्वच्छ व सुरक्षित रखने की प्रेरणा प्राप्त होती है तथा ऋतु परिवर्तन होने के संकेत मौसम में कई प्रकार के बदलाव लाते हैं। मौसम परिवर्तन की वजह से बीमारिया उत्पन्न होती है।और इन बदलावों से बचने के लिए साफ सफाई का पूर्ण ध्यान रखना होता है। शीतला माता स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं और इसी संदर्भ में शीतला माता की पूजा से हमें स्वच्छता की प्रेरणा मिलती है। चेचक रोग जैसे अनेक संक्रमण रोगों का यही मुख्य समय होता है अत: शीतला माता की पूजा का विधान पूर्णत: महत्वपूर्ण एवं सामयिक है।

Sheetala Ashtami is an important festival of Hindus, in which people practice fast and worship of Sheetla Mata. The festival of sheetala Ashtami is celebrated after some days of Holi. The worship of Goddess Sheetala starts from the Ashtami date of the dark  luner fornight of Chaitra month.

Basoda : Basoda Goddess Sheetala is worshiped on the day of Sheetala Ashtami and after the pooja, after worship only cold stale  food is offered to Sheetla Mata, which is called Basauda. The same stale food distributed in the form of prasad and this is also distributed among all dedicated devotees as Naivedya in the form of prashad.

Sheetala Mata : Sheetala Mata is worshiped as a major Hindu Goddess. About the context of Sheetala Devi description found in ​​many religious scriptures, In the Skanda Purana it is detailed described about Shitala Mata, according to which Goddess Sheetala is the Goddess of disease of the smallpox and chikenpox . Sheetala Mata held urn (kalash), soup, broom(marjan) and Neem leaves  in her hands and riding on the donkey and sits in the posture of Abhayya mudra. Monster of fever the demon fever, goddess of cholera, chunsatha disease, god of Ghentukarna skin disease and goddess of blood are stay with Sheetala Mata. In their urn (kalash), soft hygienic and germicidal water and viral lies in the form seeds of pulses. In the Skanda Purana, his Worship Strotra has been expressed in the name of the Sheetalashtak. It is believed that the creation of Sheetalashtak strotra was done by Lord Shiva for public welfare.

Worship of Sheetala Ashtami : The worship of Sheetala Ashtami is practiced on the first Monday or Thursday after the Holi. The worship of Sheetala mata ji is practiced with very high legislation, full attention is taken to make purity and clinliness. In this particular worship, the consumption of stale food of a day before sunset named as Basoda is brought to offer to Goddess Sheetala on the day of Sheetala Ashtami. On the of Ashtami Naivadya of stale foods in the form of Prashad offered to Sheetala Mata. Fast of Sheetala Ashtami is performed on this day and the story of Sheetala Mata is heard by devotee . After the story ends, the worship of the mother is performed and the Sheetalashtak is recited by devotee. The Sheetalastak shows the glory of the Goddess Sheetala , as well as after the prayer of Sheetala Mata, her mantra  वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।। मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।  is pronounced, this is a very influential mantra. After completion of worship with the right procedure and legislation prashad of Mata sheetala named Basauda is distributed to all devotees. Thus, when the worship is completed, the devotee wished the blessings of Sheetala Mata for pleasure and peace. In the whole northern India Sheetala Ashtami festival is also known as Basoda. It is believed that after this day eating of stale food is stopped. According to the belief, Goddess Sheetala is pleased with doing this fast and in the family of devotee performing fast, all the problems related to Sheetala got removed.Diseases like bodyfever, mental fever, smallpox, chickenpox, deodorant ulceration, eye disorders etc. are removed.


Significance of Sheetla Ashtami : On the day of worship of Sheetala Mata, the stove is not burnt in the house means no food cooked on that day. Ashtami tithi of hindu vikrami samvat month of the darker luner side of Chaitra, Vaishakh, Jyeshtha and Aashad is devoted to worshiping the goddess Sheetala. Hence this day is known as Sheetalashtami. In todays times, the worship of Sheetala Mata is so important because its inspiration is towards cleanliness. The worship of Goddess Sheetala gives inspiration to keep the environment clean and safe, and signs of change in the season bring many changes in the weather. Disease arises due to weather changes and to avoid these changes, cleanliness needs to be taken care of. Sheetala Mata is the goddess of cleanliness and worship of Sheetla Mata in this context gives us the inspiration for cleanliness. This is the main time of many infectious diseases such as smallpox and chickenpox disease, so the principle of worship of Sheetla Mata is absolutely important and occasional.
 
 
 
 
 
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