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Karveer Vrat~करवीर व्रत

Karvir Vrat

हिन्दू धर्म के ज्येष्ठ मास की शुक्ल प्रतिपदा करवीर व्रत का पालन किया जाता है। इस व्रत में सूर्य की आराधना का विधान है। पवित्र स्थान में जाकर कनेर वृक्ष का पूजन करें व् व्रत रखे तो संकट से छुटकारा मिलता है. यह व्रत स्त्रियों को तत्काल फल देने वाला है. पुराने समय में सावित्री, सत्यभामा और दमयंती आदि सती स्त्रियों ने इस व्रत को किया था.

हिन्दु धर्म में सूर्य पंच देवों में एक है। वह साक्षात देव माने जाते हैं। जिनकी अपार शक्ति, गति और ऊर्जा से संसार का हर प्राणी और वनस्पति जीवन शक्ति पाते हैं। वह काल के निर्धारक भी है।

 

धार्मिक मान्यताओं में भी सूर्य को समस्त इच्छाओं और कामनाओं को पूरा करने वाला बताया गया है। 

Karveer vrat pooja vidhi

इस दिन सुबह स्नान कर किसी देवस्थान पर कनेर के पेड़ की पूजा की जाती है। कनेर के पौधे को पूरी तरह से जल से सिंचा जाता है। उस पर लाल कपड़ा चढ़ाया जाता है। इसके बाद गंध, फूल, धूप, दीप, प्रसाद, भोग सहित यथाशक्ति पूजा की जाती है। इसके साथ ही भगवान सूर्य की भी यथोपचार पूजा, आराधना की जाती है। एक वस्त्र पर सात तरह के अन्न और केले, नारंगी जैसे फल रखकर यह पौराणिक बोलकर सभी पदार्थ किसी योग्य ब्राह्मण को दान कर दें -

 

करवीर विषावास नमस्ते भानुवल्लभ। मौलिमण्डन दुर्गादिदेवानां सततं प्रिय।।

 

पूरे दिन यथाशक्ति उपवास या एक समय आहार लेकर व्रत रखें। इस दिन पवित्र आचरण करें। आहार-विहार, वचन और कर्मों की अपवित्रता से दूर रहें।

 

धार्मिक दृष्टि से ऐसे व्रत के पालन से व्रती को घोर संकट और आपदा से मुक्ति मिलती है। साथ ही मानसिक और शारीरिक कष्ट दूर हो जाते हैं।

Karveer Vrat~करवीर व्रत Quotes

 
 
 
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