Subscribe for Newsletter
Inspiration - (सुखी व दुखी संत)
if you like this inspirations please share and like it  
Posted on: 22 Dec, 2012

एक आश्रम में दो संत रहते थे। दोनों हर समय ईश्वर की आराधना में लगे रहते थे। लेकिन फिर भी दोनों में एक प्रसन्न रहते थे और दूसरे अत्यंत दुखी। इस कारण दोनों के नाम ही सुखी व दुखी संत पड़ गए थे। लोग इनके पास परामर्श लेने के लिए तो आते ही थे साथ ही यह भी देखते थे कि एक जैसे ही कार्य करने के कारण भी दोनों में एक सुखी हैं और एक दुखी।
दोनों ही लोगों की समस्याओं के समाधान
भी बताते थे। हैरानी इस बात की थी कि दुखी संत के
समाधान भी सही और प्रेरणादायक होते थे।
दुखी संत अपने दुख का कारण जानना चाहते थे।
यह जानने की इच्छा लिए वह सुखी संत के साथ
अपने वयोवृद्ध गुरु के पास पहुंचे। दुखी संत
बोले, `गुरुजी, मेरा नाम तो सात्विक था लेकिन लोगों ने मेरे चेहरे पर दुख के भावों को देखकर मुझे दुखी संत की संज्ञा दे दी।` इस पर सुखी संत बोले, `मेरा नाम भी पहले सत्गुण था। लेकिन मेरे चेहरे पर प्रसन्नता के
भावों को देखकर मुझे सुखी नाम दे दिया गया।`
दुखी संत बोले, `हम दोनों की सभी गतिविधियां एक जैसी हैं लेकिन फिर भी मैं दुखी रहता हूं और सुखी खुश। भला ऐसा क्यों?` गुरु दोनों की बात सुनकर मुस्कराते हुए बोले, `दुखी बेटा, दरअसल एक जैसे काम करते हुए भी सुख और दुख के भाव अलग-अलग हो सकते
हैं। उसके पीछे कारण यह कि जो व्यक्ति हमेशा हर समस्या और दुख का सामना शांत व निश्चल मन से करता है, उसका मन प्रसन्न रहता है क्योंकि वह
जानता है कि उसकी आंतरिक शक्तियां इतनी शक्तिशाली हैं कि कोई भी विकराल समस्या या दुख उनके आगे हर ही नहीं सकता। यही भावना उसे प्रसन्न रखती है। पर यदि व्यक्ति का आत्मविश्वास डगमगाने लगता है तो वह दुखी हो जाता है। आत्मविश्वास की मजबूत डोर ही व्यक्ति को हर परिस्थिति में सुखी बनाए रखती है।`

By: Anonynmus        Back
UPCOMING EVENTS
  Purnima Shradh 2018, 24 September 2018, Monday
  When is Somvati Amavasya 2018, 8 October 2018, Monday
Comments:
Sun Sign Details

Aries

Taurus

Gemini

Cancer

Leo

Virgo

Libra

Scorpio

Sagittarius

Capricorn

Aquarius

Pisces
Free Numerology
Enter Your Name :
Enter Your Date of Birth :
Ringtones
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com