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Hariyali Amavasya~हरियाली अमावस्या


हरियाली अमावस्या जिसे सावन अमावस्या या श्रावण अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू कैलेंडर के श्रावण मास (सावन महीने) में अमावस्या को मनाया जाने वाला एक महत्वपूर्ण हिंदू त्यौहार है व् इसे अत्यधिक शुभ माना जाता है।हरियाली अमावस्या आमतौर पर प्रसिद्ध हरियाली तीज से तीन दिन पहले पड़ती है।

उत्तर भारत के विभिन्न मंदिरों में, विशेष रूप से मथुरा और वृंदावन में, हरियाली अमावस्या के दिन विशेष कार्यक्रमो का आयोजन किया जाता है। भगवान कृष्ण के विशेष दर्शन के लिए हजारों कृष्ण भक्त मथुरा में द्वारकाधीश मंदिर और वृंदावन में बांकेबिहारी मंदिर का दर्शन करने आते हैं।

वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर में फूल बंगला कृष्ण भक्तों के बीच विश्व प्रसिद्ध है। कृष्ण मंदिरों के अलावा विभिन्न शिव मंदिर भी हरियाली अमावस्या के दिन विशेष शिव दर्शन की व्यवस्था करते हैं।

हिंदी भाषा में, 'अमावस्या' का अर्थ है 'चंद्रमा का न होना' और 'हरियाली' का अर्थ है 'प्रकृति का नव संचार', इसलिए हरियाली अमावस्या को वर्षा ऋतू के दौरान चंद्रमा के एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में देखा जाता है। हरियाली अमावस्या श्रावण मास के दौरान आती है। आंध्र प्रदेश, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात और तमिलनाडु में आषाढ़ अमावस्या से मेल खाती है, जहां अमावसंत चंद्र कैलेंडर को माना जाता है।

 

हरियाली अमावस्या का महत्व:

हरियाली अमावस्या हिंदुओं के लिए एक अद्भुत दिन है जो 'हरियाली तीज' के त्यौहार से तीन दिन पहले पड़ता है। श्रावण माह का महीना हिंदू चंद्र कैलेंडर का पांचवा महीना है जो भगवान शिव को समर्पित है। इसके अलावा इस महीने का बारिश के मौसम के साथ बहुत महत्वपूर्ण सबंध है यह महीना अच्छी फसल और कीटनाशकों की रोकथाम के कारण प्रमुख है। जैसा कि पौराणिक ग्रंथो से संकेत मिलता है, हिंदू देवी-देवताओं का प्रसन्न करने के लिए 'श्रावण' का महीना अत्यंत शुभ माना जाता है। हरियाली अमावस्या पर कीर्तन तर्पण और दान पुण्य जैसी गतिविधियाँ करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है |

इसी तरह, हिंदू संस्कृति में, वृक्षों को भगवान का स्वरूप माना जाता है और व्यक्ति हरियाली अमावस्या पर उनकी पूजा करते हैं। कुछ क्षेत्रों में इस दिन 'पीपल' के पेड़ की पूजा करने का रिवाज है। जैसा कि हरियाली अमावस्या पर वर्षा ऋतु की शुरुआत भी होती है और इस दिन वृक्षारोपण को उत्पादक के रूप में देखा जाता है।


हरियाली अमावस्या उत्सव के रीति रिवाज

किसी नदी या झील में मछलियों को आटे की गोलियां बनाकर खिलाएं।

इस दिन हनुमान जी के मंदिर में जाना लाभकारी होता है। इस दिन उन्हें श्रद्धा से सिंदूर और चमेली का तेल चढ़ाएं।

रात के समय मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए घर के ऊपरी पूर्व कोने में घी का दीपक जलाएं। ऐसा करने से माँ लक्ष्मी प्रसन्न होती है ।

पूजा की थाली पर स्वस्तिक या ॐ बनाएं और उस पर महालक्ष्मी यंत्र रखें।


हरियाली अमावस्या के दिन वृक्षारोपण का महत्व

हरियाली अमावस्या के अवसर पर, लोगो को पेड़ लगाने चाहिए। ऐसा करने से जीवन के संकट तो दूर होते ही हैं अपितु लाभ की प्राप्ति भी होती है। यह माना जाता है कि पेड़ में देवी का वास होता है, इसलिए इस दिन पौधा लगाना शुभ माना जाता है।

 



Hariyali Amavasya, also known as Savan Amavasya or Shravan Amavasya, is an important Hindu festival celebrated on Amavasya in the Shravan month (Savan month) of the Hindu calendar and is considered highly auspicious.Hariyali Amavasya usually falls three days before the famous Hariyali Teej.

Special programs are organized in various temples of North India, especially in Mathura and Vrindavan, on the day of Hariyali Amavasya. Thousands of Krishna devotees visit the Dwarkadhish temple in Mathura and the Bankebihari temple in Vrindavan for a special darshan of Lord Krishna.

The flower bungalow at Banke Bihari Temple in Vrindavan is world famous among Krishna devotees. Apart from Krishna temples, various Shiva temples also arrange special Shiva Darshan on the day of Hariyali Amavasya.

In Hindi language, 'Amavasya' means 'no moon' and 'Hariyali' means 'Greenary', hence Hariyali Amavasya is seen as an important festival of the moon during Rainy Season. Hariyali comes during Amavasya Shravan month. Ashadh corresponds to Amavasya in Andhra Pradesh, Goa, Maharashtra, Karnataka, Gujarat and Tamil Nadu, where the Amavasant lunar calendar is considered.

 

Importance of Hariyali Amavasya:

Hariyali Amavasya is a wonderful day for Hindus which falls three days before the festival of 'Hariyali Teej'. The month of Shravan is the fifth month of the Hindu lunar calendar which is dedicated to Lord Shiva. Apart from this, this month is very important with the rainy season, this month is important because of good crops and pesticide prevention. As indicated by mythological texts, the month of 'Shravan' is considered very auspicious to please the Hindu deities. Performing activities like Kirtan Tarpan and Daan Punya on Hariyali Amavasya provides freedom from all sins.

Similarly, in Hindu culture, trees are considered to be the image of God and individuals worship them on the Hariyali Amavasya. In some areas it is customary to worship the 'Peepal' tree on this day. As the green season begins on the new moon and the plantation is seen as productive on this day.

 

Rituals of Hariyali Amavasya festival

In a river or lake, feed fish by making flour tablets.

It is beneficial to visit Hanuman ji's temple on this day. Offer vermilion and jasmine oil to them on this day with reverence.

To please Goddess Lakshmi during the night, light a lamp of ghee in the upper east corner of the house. Mother Lakshmi is pleased by doing this.

Make a swastika or om on the plate of worship and place Mahalakshmi Yantra on it.

 

Importance of plantation on Hariyali Amavasya day

On the occasion of Hariyali Amavasya, people should plant trees. By doing this, the crises of life are not only overcome, but also the benefits are obtained. It is believed that the goddess resides in the tree, so planting a plant on this day is considered auspicious.

 
 
 
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