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Diwali~दिवाली - Diwali Pujan Vidhi

श्री महालक्ष्मी पूजन विधि :

जनसाधारण के लिये विधि विधान द्वारा पूजन करना एक दुष्कर कार्य है। जो व्यक्ति कर्मकांड में निपुण होता है, उस व्यक्ति के द्वारा ही यह कार्य कुशलतापूर्वक सम्पन्न किया जाता है। इस पूजन में अनेक मंत्रो का प्रयोग किया जाता है जो कि संस्कृत भाषा में होते हैं। इसलिये मंत्रो उच्चारण में त्रुटि की सम्भावना भी रहती है। जो व्यक्ति कर्म कांड से अनभिग्य हैं, वे यदि इसे कर रहे है तो सावधानी और सतर्कता पूर्वक करे।

प्रारंभिक पूजा की तैयारी :

दीपावली के दिन शुभ मुहूर्त में घर में या दुकान में, पूजा घर के सम्मुख चौकी बिछाकर उस पर लाल वस्तर बिछाकर लछ्मी-गणेश जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें तथा चित्र को पुष्पमाला पहनाएं। मूर्ति मयी श्री महालक्ष्मी जी के पास ही किसी पवित्र पात्र में केसर युक्त चन्दन से अष्टदल कमल बनाकर उस पर द्रव्य-लछ्मी (रुपयों) को भी स्थापित करके एक साथ ही दोनों की पूजा करनी चाहिये। 

पूजन-सामग्री को यथास्थान रख ले। पूजन के लिये पूर्व या उतर दिशा की और मुख करके बैठें। इसके पश्चात धूप, अगरबती और 5 दीप शुद्ध घी के और अन्य दीप तिल के तेल / सरसों के तेल से प्रज्वलित करें। जल से भरा कलश भी चौकी पर रखें। कलश में मौली बांधकर रोली से स्वास्तिक का चिन्ह अंकित करें। 

तत्पश्चात श्री गणेश जी को, फिर उसके बाद लक्ष्मी जी को तिलक करें और पुष्प अर्पित करें। इसके पश्चात हाथ में पुष्प, अक्षत, सुपारी, सिक्का और जल लेकर संकल्प करें।

संकल्प :

मैं (अपना नाम बोलें), सुपुत्र श्री (पिता का नाम बोलें), जाति (अपनी जाति बोलें), गोत्र (गोत्र बोलें), पता (अपना पूरा पता बोलें) अपने परिजनो के साथ जीवन को समृध्दि से परिपूर्ण करने वाली माता महालक्ष्मी जी की कृपा प्राप्त करने के लिये कार्तिक कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन महालक्ष्मी जी का पूजन कर रहा हूँ। हे मां, कृपया मुझे धन, समृध्दि और ऐश्वर्य देने की कृपा करें। मेरे इस पूजन में स्थान देवता, नगर देवता, इष्ट देवता कुल देवता और गुरु देवता सहायक हों तथा मुझें सफलता प्रदान करें।

यह संकल्प पढकर हाथ में लिया हुआ जल, पुष्प और अक्षत आदि श्री गणेश-लक्ष्मी जी के समीप छोड दें।

क्रम अनुसार महालक्ष्मी पूजन विधि :

इसके बाद एक एक कर के गणेश जी, मां लक्ष्मी, मां सरस्वती (Accounts Books/Register/Baheekhaata), मां काली (Ink Pot Poojan), धनाधिश कुबेर (Tijori/Galla), तुला मान की पूजा करें। यथाशक्ती भेंट, नैवैद्य, मुद्रा, वस्तर आदि अर्पित करें।

दीपमालिका पूजन :

किसी पात्र में 11, 21 या उससे अधिक दीपों को प्रज्वलित कर महालक्ष्मी के समीप रखकर उस दीप-ज्योतिका “ॐ  दीपावल्यै नमः” इस नाम मंत्र से गन्धादि उपचारों द्वारा पूजन कर इस प्रकार प्रार्थना करे-

त्वं ज्योतिस्तवं रविश्चन्दरो विधुदग्निश्च तारकाः।

सर्वेषां ज्योतिषां ज्योतिर्दीपावल्यै नमो नमः।।

दीपमालिकाओं का पूजन कर अपने आचार के अनुसार संतरा, ईख, पानीफल, धान का लावा इत्यादि पदार्थ चढाये। धान का लावा (खील) गणेश जी, महालक्ष्मी जी तथा अन्य सभी देवी देवताओं को भी अर्पित करे। अन्त में अन्य सभी दीपकों को प्रज्वलित कर सारे घर को दीपों से प्रकाशित करें।

आरती और पुष्पांजलि :

गणेश जी, लक्ष्मी जी और भगवान जगदीश्वर की आरती करें। उसके बाद पुष्पान्जलि अर्पित करें, क्षमा याचना करके प्रार्थना करें।

विसर्जन : 

पूजन के अन्त में हाथ में अक्षत लेकर नूतन गणेश एवं महालक्ष्मी जी की प्रतिमा को छोडकर अन्य सभी आवाहित, प्रतिष्ठित एवं पूजित देवताओं को अक्षत छोडते हुए निम्न मंत्र से विसर्जित करे-

यान्तु देवगणाः सर्वे पूजमादाया मामकीम्।

इष्टकामसमृध्दयर्थं पुनरागमनाया च।।

Please Note:

मंदिर, तुलसी माता, पीपल आदि के पास दीपक जलाना नहीं भूलना।

माता लक्ष्मी जी की पूजा में तिल के तेल का उपयोग ही श्रेष्ठ होता है। अभाव में सरसों का तेल भी उपयोग कर सकते है। 


 

 
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