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Navratri~नवरात्री - Pratham Navratri Maa Shri Shail Putri प्रथम नवरात्री माँ श्री शैल पुत्री

दुर्गा-पूजा के पहले दिन मां शैलपुत्री की उपासना की जाती है। शारदीय नवरात्र का प्रारम्भ अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को कलश स्थापना के साथ किया जाता है। कलश को हिन्दु पुराणो तथा विधानों में मंगलमूर्ति गणेश का स्वरूप माना जाता है अत: सबसे पहले उन्ही की पूजा तथा स्थापना की जाती है।

कलश स्थापना के लिए भूमि को स्वच्छ जल से धो कर शुद्ध किया जाता है। गोबर और गंगा-जल से भूमि का लेपन किया जाता है। विधि - विधान के अनुसार इस स्थान पर अक्षत अर्थात चावल में कुमकुम मिलाकर डाला जाता है तत्पश्चात इस पर कलश को स्थापित किया जाता है।

नवरात्रि का पहला दिन मां शैलपुत्री को समर्पित होता है। श्री मार्कण्डेय पुराण के अनुसार देवी का यह नाम हिमालय के यहां पुत्री रूप में जन्म लेने से पड़ा। हिमालय को शक्ति, दृढ़ता, आधार व स्थिरता का प्रतीक माना जाता है।

मां शैलपुत्री को अखंड सौभाग्य देने वाली देवी माना जाता है। नवरात्रि के प्रथम दिन योगीजन अपनी शक्ति मूलाधार में स्थित करते हैं व योग तथा साधना करते हैं। इनकी पूजन विधि इस प्रकार है-

सबसे पहले चौकी पर माता शैलपुत्री की प्रतिमा या तस्वीर को विराजमान करें। इसके बाद गंगा जल से शुद्धिकरण करें। चौकी पर चांदी, तांबे, पीतल, अन्य धातु या मिट्टी के कलश में जल भरकर उस पर नारियल रखकर कलश स्थापित  करें। उसी चौकी पर श्रीगणेश, वरुण, नवग्रह, षोडश मातृका (16 देवी), सप्त घृत मातृका(सात सिंदूर की बिंदी) की स्थापना भी करें।

इसके बाद व्रत तथा पूजन का संकल्प लें और वैदिक एवं सप्तशती मंत्रों द्वारा मां शैलपुत्री सहित समस्त स्थापित देवताओं की षोडशोपचार पूजा करें। इसमें आवाहन, आसन, पाद्य, अ‌र्ध्य, आचमन, स्नान, वस्त्र, सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि का प्रयोग करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण करके पूजन संपन्न करें।

शैलपुत्री ध्यान मंत्र :

वन्दे वांछित लाभाय चन्द्रा‌र्द्वकृतशेखराम्।
वृषारूढ़ा शूलधरां यशस्विनीम्॥

इस मंत्र के अनुसार - देवी शैलपुत्री वृषभ पर विराजित हैं। जिनके दाहिने हाथ में त्रिशूल है और बाएं हाथ में कमल पुष्प सुशोभित है। यही नवदुर्गाओं में प्रथम माँ दुर्गा है। नवरात्रि के प्रथम दिन देवी उपासना के अंतर्गत शैलपुत्री का पूजन करना चाहिए।

प्रथम नवरात्री पूजन का महत्व :

हमारे जीवन प्रबंधन में दृढ़ता, स्थिरता व आधार का महत्व सर्वप्रथम है। अत: नवरात्रि के पहले दिन हमें अपने स्थायित्व व शक्तिमान होने के लिए माँ शैलपुत्री से प्रार्थना करनी चाहिए। शैलपुत्री की आराधना करने से जीवन में स्थिरता आती है। हिमालय की पुत्री होने से यह देवी प्रकृति स्वरूपा भी है। स्त्रियों के लिए उनकी पूजा करना अति श्रेष्ठ एवं मंगलकारी है तथा सौभाग्य को प्रदान करने वाली है।
 
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