बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती की पूजा विधि विधान से की जाती है। मां सरस्वती ज्ञान-विज्ञान, कला, संगीत और शिल्प की देवी हैं। अज्ञानता के अंधकार को दूर करने के लिए और जीवन में नया उत्साह प्राप्त करने के लिए बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की उपासना लोगो द्वारा बड़ी श्रद्धा और भक्तिभाव से की जाती है।
इस दिन पढ़ाई में कमजोर बच्चे मां सरस्वती की आराधना और कुछ उपाय करके उनकी कृपा प्राप्त कर सकते है।
मां सरस्वती की पूजा विधि :
सुबह सवेरे स्नान करके पीले या सफेद वस्त्र धारण करें, मां सरस्वती की मूर्ति या चित्र उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करें। मां सरस्वती को सफेद चंदन, पीले और सफेद फूल अर्पित करें। उनका ध्यान करते हुए ऊं ऐं सरस्वत्यै नम: मंत्र का 108 बार जाप करें। मां सरस्वती की आरती करें दूध, दही, घी, शकर, शहद और तुलसी मिलाकर पंचामृत का प्रसाद बनाकर मां को भोग लगाएं।
इस दिन करें ये उपाय
ज्योतिष के अनुसार जिनकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर हो या अस्त हो या बच्चे का पढ़ाई में मन ना लगे तो बसंत पंचमी के दिन मां सरस्वती को हरे फल आर्पित करके कम से कम 11 गरीबों को अवश्य बांटना चाहिए।
पढऩे वाले स्थान के पर्दे, कुर्सी के कवर आदि हल्के हरे रखें, काले या गहरे नीले न हों।
सरस्वती माता का चित्र अपने अध्ययन कक्ष या टेबल पर रखें।
अपनी टेबल पर क्रिस्टल या स्फटिक का ग्लोब रखें और उसे दिन में कम से कम तीन बार घुमाएं।
तुलसी के 11 पत्ते मिश्री के साथ गटक जाएं पर चबाएं नहीं।
कुछ और अचूक उपाय-
1.बुद्धि में विकास के लिए वसंत पंचमी के दिन काली मां के दर्शन कर पेठा या कोई भी फल अर्पित कर ‘ॐ ऐं ह्रीं क्लीं महा सरस्वत्यै नम:’ मंत्र का सस्वर जाप करना चाहिए।
2.न्यायिक मामलों, पति-पत्नी संबंधी विवादों या स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों के समाधान हेतु दुर्गा सप्तशती में वर्णित ‘अर्गला स्तोत्र’ और ‘कीलक स्तोत्र’ का पाठ कर श्वेत वस्त्र का दान करने से लाभ होगा।
3.संगीत के क्षेत्र में सफल होना चाहते हैं, तो मां सरस्वती का ध्यान कर के ‘ह्रीं वाग्देव्यै ह्रीं ह्रीं’ मंत्र का जाप करें। शहद का भोग लगा कर उसे प्रसाद के रूप में वितरित करें।

