Inspiration - (सत्य का अभ्यास)

एक संत तपस्या में लीन थे। तपस्या की अवधि के दौरान वे दो सिद्धांतों पर अडिग थे - "सत्यनास्ति परम धर्मः" अर्थात सत्य से बढ़कर कोई दूसरा धर्म नहीं है और "अहिंसा परमो धर्मः" अर्थात अहिंसा से बढ़कर कोई धर्म नहीं।

संत से ईर्ष्या करने वाला एक व्यक्ति उनका व्रत तोड़ना चाहता था। वह हमेशा इस प्रयास में रहता कि किसी तरह संत को झूठ बोलने या हिंसा करने के लिए विवश किया जाए। एक दिन वह संत की कुटिया में शिकारी का वेश धारण करके पहुंचा। वह एक हिरन का पीछा करते हुए वहां पहुंचा था जो कुछ समय पूर्व ही कुटिया में घुसा था।

एक भोलेभाले आदमी की तरह उसने संत से पूछा कि क्या उन्होंने किसी हिरन को अंदर आते हुए देखा है? संत असमंजस में पड़ गए। उन्होंने हिरन को अंदर आते देखा था अतः वे झूठ नहीं बोल सकते थे। लेकिन यदि वे सत्य बोल देते तो उस हिरन का वध तय था। उन्होंने एक पल विचार करने के बाद कहा - "हे मानव! जो देखा है उसे कहा नहीं जा सकता और जो कहा जा सकता है उसे देखा नहीं।" संत की गूढ़ बात का अर्थ समझ में नहीं आने पर वह व्यक्ति वहां से चला गया।

संत की बात में गहरा सार छुपा था। आँखों ने हिरन को देखा था पर आँखें बोल नहीं सकतीं, और मुँह बोल सकता है किंतु देख नहीं सकता।

ऐसा सत्य जिससे किसी निर्दोष को हानि पहुंचे उसे कहा नहीं जाना चाहिए। लेकिन अहिंसक होने के लिए व्यक्ति को झूठ बोलने की आवश्यकता नहीं है। ऐसे असमंजस के क्षणों में मनुष्य को युक्ति पूर्वक काम करना चाहिए

UPCOMING EVENTS
  Varuthini Ekadashi Vrat, 13 April 2026, Monday
  Baisakhi, 14 April 2026, Tuesday
  Bohag Bihu, 14 April 2026, Tuesday
  Akshaya Tritiya, 19 April 2026, Sunday
  Parshuram Jayanti, 19 April 2026, Sunday
  Ganga Saptami, 23 April 2026, Thursday
Subscribe for Newsletter
Sun Sign Details

Aries

Taurus

Gemini

Cancer

Leo

Virgo

Libra

Scorpio

Sagittarius

Capricorn

Aquarius

Pisces
Free Numerology
Enter Your Name :
Enter Your Date of Birth :
Ringtones
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com