Subscribe for Newsletter

Dhanteras

Dhanteras
This year's Dhanteras

Friday, 25 Oct - 2019

Dhanteras in the Year 2019 will be Celebrated on Friday, 25 Octuber 2019.

कार्तिक माह की कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का उत्सव मनाया जाता है। पौराणिक ग्रंथो के अनुसार इस दिन धनवंतरी का जन्म हुआ था | इसलिए इस दिन को धनतेरस कहा जाता हैं। धनवंतरी के जन्म के अलावा इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर की भी पूजा की जाती है। भगवान धनवंतरी समुद्र मंथन के दौरान अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन बर्तन खरीदने की प्रथा है।

 

धनतेरस शुभ मुहूर्त व् दिनांक 2019

शुक्रवार, 25 अक्टूबर

शाम 19:10 से 20:15 तक

प्रदोष काल

17:42 से 20:15 तक

वृषभ काल

18:51 से 20:47 तक

 

पौराणिक मान्यताओं से जुड़ी एक कथा

हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, धनतेरस का त्यौहार राजा हेमा के 16 वर्षीय बेटे से जुडी एक बहुत ही दिलचस्प कहानी है। यह भविष्यवाणी की गई थी कि राजकुमार विवाह के चार दिन पश्चात सांप द्वारा काट लिया जाएगा और मृत्यु को प्राप्त होगा। भविष्यवाणी वाली रात, उनकी पत्नी ने सोने और चांदी के आभूषणों के साथ उनके कक्ष के प्रवेश द्वार को घेर लिया। फिर वह पूरी रात वहीँ रुकी रही, राजकुमार को कथायें सुनाई और गाने गाए ताकि उसे नींद न आये। आभूषण और गहनों ने मृत्यु के देवता यम को इतना चकाचौंध कर दिया कि उसने राजकुमार को जीवित रखने का फैसला कर लिया।

अगले दिन को धनतेरस के त्यौहार के रूप में मनाया जाने लगा।

 

धनतेरस पर आखिर क्यों खरीदे जाते हैं बर्तन

कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन समुंद्र मंथन से धनवंतरी प्रकट हुए| धनवंतरी जब सामने आये तो उनके हाथो में अमृत से भरा कलश था| भगवान धनवंतरी कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस दिन बर्तन खरीदने की परंपरा है| विशेष रूप से पीतल और चाँदी के बर्तन खरीदने का प्रचलन है, क्योंकि पीतल भगवान धनवंतरी की धातु है| इससे घर में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य में बढ़ोतरी होती है| धनतेरस के शुभ दिन धन के देवता कुबेर और मृत्यु के देवता यम की पूजा करने का विशेष महत्व है| इस दिन को धनवंतरी जयंती के नाम से भी पहचाना जाता है|


धनतेरस पूजा विधि-

धनतेरस पूजन विधि को करना बहुत ही आसान और सरल है | लेकिन धनतेरस पूजन के लिए साफ़ - सफाई पर विशेष ध्यान देना चाहिए क्यूंकि भगवान धनवंतरी और माता लक्ष्मी केवल साफ एवं स्वच्छ स्थान पर ही विराजती हैं |  धनतेरस पूजा करने का उचित तरीका :-

संध्याकाल में उत्तर दिशा की ओर कुबेर तथा धनवंतरी की प्रतिमा को स्थापित करें |  स्थापना के पश्चात कुबेर तथा धनवंतरी के सामने 1-1 घी का दीपक जलाएं | कुबेर को सफेद मिठाई और धनवंतरी को पीली मिठाई अर्पित करें |

फिर पहले ह्रीं कुबेराय नमः मन्त्र का जाप करें | इसके उपरान्त “धनवंतरी स्तोत्र” का पाठ करें। धनवंतरी पूजा करने के बाद भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की पूजा करना अति आवश्यक है।

मिट्टी के दीप में घी डालकर दीप प्रज्ज्वलित करें, धुप जलाएं व् भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की आरधना करें। उनको फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं, इसके बाद घर के सभी सदस्य प्रसाद ग्रहण करें।

पूजा के पश्चात, दीपावली के दिन, कुबेर को धन स्थान पर और धनवंतरी को पूजा स्थान पर स्थापित करें।

किसी साफ लकड़ी के तख्त में रोली के माध्यम से स्वस्तिक का निशान बनायें।फिर मिट्टी के चौमुखी दीपक को तख्त पर रखकर दीपक के चारों ओर तीन बार गंगा जल का छिड़काव करें।

दीपक पर रोली का तिलक लगाए | उसके बाद तिलक पर चावल रखें। दीपक पर फूल अर्पित करें।दीपक में थोड़ी चीनी डालें।

इसके बाद 1 रुपये का सिक्का दीये में डालें।

फिर परिवार के सभी सदस्यों को तिलक लगाएं।

दीपक को घर के सभी सदस्यों के साथ नमन करें।

व् दीपक को घर के मुख्य द्वार पर रखें, उसे दाहिने तरफ और दीपक की लौ दक्षिण दिशा की तरफ रखें

क्यूंकी यह दीपक मृत्युलोक के देव यमराज के पूजा के लिए जलाया जाता है, इसलिए दीप जलाते समय पूर्ण श्रद्धा से उन्हें नमन करें और प्रार्थना करें कि वे आपके परिवार पर दया दृष्टि बनाए रखें और किसी की अकाल मृत्यु न हो |

 



The festival of Dhanteras is celebrated on the Trayodashi date of Krishna Paksha of Kartik month. According to mythological texts, Dhanvantri was born on this day. Therefore, this day is called Dhanteras. Apart from the birth of Dhanvantari, Goddess Lakshmi and Kubera are also worshiped on this day. Lord Dhanvantari appeared with the Amrit Kalash during the sea churning, so it is a custom to buy utensils on this day.

 

Dhanteras Auspicious Time and Date 2019

Friday, October 25

19:10 to 20:15

Pradosh Kaal

17:42 to 20:15

Taurus period

18:51 to 20:47

 

A legend related to mythological beliefs

According to Hindu mythology, the festival of Dhanteras is a very interesting story involving the 16-year-old son of King Hema. It was predicted that the prince would be bitten by a snake four days after marriage and die. On a prophetic night, his wife surrounded the entrance to his chamber with gold and silver jewelery. Then she stayed there all night, told stories to the prince and sang songs so that she could not sleep. The jewelery and ornaments dazzled Yama, the god of death, so much that he decided to keep the prince alive.

The next day was celebrated as the festival of Dhanteras.


Why are utensils bought on Dhanteras

Dhanwantari appeared on the day of Trayodashi of Kartik Krishna Paksha by the sea churning. When Dhanwantari came in front, he had an urn full of nectar in his hands. Lord Dhanwantari appeared with the urn, therefore, it is a tradition to buy utensils on this day. It is especially popular to buy brass and silver utensils because brass is the metal of Lord Dhanvantari. This increases happiness, prosperity, and health in the home. Worshiping Kubera, the god of wealth and Yama, the god of death, has special significance on the auspicious day of Dhanteras. This day is also known as Dhanvantari Jayanti.

 

Dhanteras Puja Vidhi-

Performing the Dhanteras worship method is very easy and simple. But for worshiping Dhanteras, special attention should be paid to cleanliness because Lord Dhanvantari and Mata Lakshmi reside only in a clean and clean place. Proper way to worship Dhanteras: -

In the evening, install the statue of Kubera and Dhanvantari towards the north. After installation, light 1-1 ghee lamp in front of Kubera and Dhanwantri. Offer white sweets to Kuber and yellow sweets to Dhanvantari.

Then first chant the "Hin Kuberai Namah" mantra. After this, read "Dhanwantari Stotra". After performing Dhanvantari Puja it is very important to worship Lord Ganesha and Mother Lakshmi.

Put ghee in the earthen lamp and light the lamp, burn incense and pray to Lord Ganesha and Goddess Lakshmi. Offer flowers to them and offer sweets, after which all the members of the house take the prasad.

After the Puja, on the day of Deepavali, install Kubera at the place of wealth and Dhanvantari at the place of worship.

Make a mark of the swastika by rolling it in a clean wooden plank. Then put a spherical lamp of clay on the throne and sprinkle the Ganges water around the lamp thrice.

Put a Tilak of Roli on the lamp. After that place rice on tilak. Offer flowers on the lamp. Add some sugar to the lamp.

After this, put 1 rupee coin in the diyas.

Then apply tilak to all the family members.

Salute Deepak with all the members of the house.

Place the lamp at the main entrance of the house, keep it on the right side and the flame of the lamp towards the south

Because this lamp is lit for the worship of Yamaraja, the deity of the dead, so while lighting the lamp, bow to them with full devotion and pray that they maintain a compassionate view on your family and no one dies prematurely.

 
 
 
 
 
UPCOMING EVENTS
  Utpanna Ekadasi Vrat 2019, 22 November 2019, Friday
  Vivah Panchami Festival dates in 2019, 1 December 2019, Sunday
  Mokshada Ekadashi 2019 Date, 8 December 2019, Sunday
  Saphala Ekadashi 2019 Date, 22 December 2019, Sunday
  English New Year 2020, 1 January 2020, Wednesday
 
Comments:
 
 
Find More
Copyright © MyGuru.in. All Rights Reserved.
Site By rpgwebsolutions.com