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ज्ञान व वैराग्य के बिना अधूरी है भक्ति

 
ज्ञान व वैराग्य के बिना अधूरी है भक्तिInformation related to ज्ञान व वैराग्य के बिना अधूरी है भक्ति.

सत्संग की सरिता में सराबोर होने का अवसर उन्हें ही प्राप्त होता है जिन्हें प्रभु चाहे या जन्म-जन्मांतरों के पुण्य पुंज का उदय हो जाए। भक्ति ज्ञान व वैराग्य के बिना अधूरी है। जैसे पुत्र के बिना मां का मातृत्व अधूरा होता है, वैसे ही ज्ञान वैराग्य के बिना भक्ति अधूरी होती है।  भगवान कण-कण में विद्यमान हैं। हम सभी ने भगवान को नहीं देखा और भूत को भी नहीं देखा केवल सुना है फिर भी लोग भगवान पर कम और भूत पर ज्यादा विश्वास करते हैं। शास्त्री ने भीष्म पितामह के त्याग व समर्पण का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने अर्जुन की पत्‍‌नी उत्तरा को मां में सर्वोत्तम मां बताया और कहा कि केवल उत्तरा ही ऐसी मां थी जिसने भक्त और भगवान दोनों को नौ माह तक अपने गर्भ में रखा।  जब अस्वस्थामा ने उत्तरा के गर्भ को नष्ट करने के लिए बाण द्वारा प्रहार किया तो श्री हरि ने उत्तरा के गर्भ में प्रवेश कर बाण को अपने अगूं े से रोक दिया। जब भक्त पर कोई संकट आता है तो भगवान उसकी रक्षा के लिए कवच बनकर खडे हो जाते हैं। 

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