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धर्म से दूर होता है अहंकार

 

धर्म हमारे अंदर एकता, भाईचारा व सर्व धर्म समभाव की भावना जागृत करता है। धर्म का पालन करने वाला कभी अहंकारी नहीं होता।

सच्चा धर्म वहीं जो हमारे अंदर के अहंकार को नष्ट कर दे। भरत का चरित्र भी कुछ ऐसा ही था। भरत धर्म के नए अर्थ के रूप में सामने आए और उनके त्याग को धर्म के नए मार्ग के रूप में मान्यता दी गई।

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